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Aag Se Taj - I wear My Story as a Saree


We Design Stories That you can wear - Here's Mine

आग से ताजI wear my story

एक लड़की थी दीवानी सी,एक सपने पे वो मरती थी।

नज़रें झुका कर, शर्माकर,गलियों से वो गुजरती थी।

कुछ बनना था शायद उसको,

पर, जाने किस से डरती थी।


आओ देखें उसके मन में

क्यों वो इतना सहमती थी।

हाँ, देखो—

वो हंसा था उसकी चाल पर,

और वो उसके बिखरे बाल पर।

अरे!! “तू कितनी मोटी,” कोई बोली; “तू कितनी नाटी,” किसी की ठिठोली। बात करे तो अकल नहीं; बाहर निकले तो शक्ल नहीं।

लड़कों के संग बैठती नहीं-अकड़ू होगी ;

उस छोरे से बोली—“फिसलू” होगी।

पति से मार खाई—छी छी अनपढ़ है क्या;

पति को छोड़ आई—कुछ ज़्यादा ही मॉडर्न है।


कमाती नहीं—बच्चा कैसे पालेगी?

अरे!!! नौकरी करने लगी… बच्चा बुढ़ापे में क्या माँ संभालेगी?

सजती नहीं—झल्ली है; ज़्यादा ही मेकअप—“पगली” है।


“जैसी माँ, वैसा बेटा”—कह दिया;

फिर उसकी हड्डी पे कबड्डी खेलती है ये भी ताना दिया।

लोग बोलते रहे, वो सिकुड़ती रही;

अपमान की आग में धीरे-धीरे सुलगती रही।


और फिर बस!!!!

दोस्ती कर ली मैंने उस आग से।

न जलेंगे मेरे सपने, न मेरी पहचान;

अब ये आग जलाएगी तो बस—मेरा डर, मेरा अपमान।


मेरी चाल है अनोखी, मेरे सपनों जैसी;

मेरे बाल—मेरा ताज।मेरी बातें—मेरे मन का आईना;

शक्ल मेरी—रूह की आवाज़। किसी के जैसी मैं कहाँ


मैं वो नहीं जो तुम कहोगे;

मैं वो हूं जो मैं बनी हूं, जो मैं बनूंगी।

कल भी उसकी रचना थी;आज भी उसकी कृति हूं।

सीख ये मिली: दुनिया ने तब गले लगाया,

मैंने जब समझा खुद को और अपने को अपनाया।

आज मैंने सुंदरता नहीं, शक्ति पाई है;

इज़्ज़त वही—जो अपने मन से कमाई है।

अपनी कहानी को कुछ यूँ अपनाया है,

आग से ताज मैंने ही बनाया है।


Don’t wear your heart on your sleeve?!

Fine! My soul wears my fire.


आज से ताज — from today, I wear my story.

 
 
 

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